रविवार, 2 अगस्त 2015

आगे नया सबेरा रे

जड़ पकड़ने लगी है मीठी नीम 
फूलने लगे हैं जिरेनियम  
चल उड़ जा रे पँछी 
के अब ये देस हुआ बेगाना 

आस निरास के दोराहे पर 
डाला है क्यूँ डेरा रे 
अटका है क्यूँ उसी डाल पर 
ये तो जोगी वाला फेरा रे 

तू क्या जाने किस किस डाल पे 
आगे तेरा बसेरा रे 
आँख खोल अब जाग मुसाफिर 
आगे नया सबेरा रे 


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